भारतीय चुनाव आयोग की 30 प्रमुख पहलें

🗳️ भारतीय चुनाव आयोग की 30 प्रमुख पहलें

भारतीय चुनाव आयोग की 30 प्रमुख पहलें



प्रस्तावना

भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने वर्ष 2025 में चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तकनीकी रूप से सशक्त और मतदाता–केन्द्रित बनाने के उद्देश्य से पिछले छह महीनों में लगभग 30 महत्वपूर्ण सुधारात्मक पहलें लागू की हैं। ये पहलें प्रशिक्षण, मतदाता सुविधा, तकनीकी सुधार, प्रशासनिक दक्षता तथा कानूनी ढाँचे को मजबूत करने से संबंधित हैं।


मतदान एवं मतदाता सुविधा संबंधी पहलें

  • मतदान केंद्रों पर मोबाइल जमा सुविधा — मतदाताओं के मोबाइल फोन सुरक्षित रूप से जमा कराने की व्यवस्था।
  • सुधारित वोटर सूचना पर्ची (VIS) — सीरियल और पार्ट नंबर को बड़े अक्षरों में प्रदर्शित किया गया।
  • प्रति मतदान केंद्र 1200 मतदाताओं की सीमा — भीड़ कम करने और कतारें घटाने हेतु।
  • उच्च आवासीय परिसरों में अतिरिक्त बूथ की व्यवस्था।
  • रियल-टाइम मतदान अपडेट — Presiding Officers द्वारा हर 2 घंटे में ECINET ऐप पर अपलोड।
  • 100% वेबकास्टिंग — प्रत्येक मतदान केंद्र पर सतत निगरानी।


डिजिटल एवं तकनीकी सुधार

  • ECINET पोर्टल — 40 से अधिक ऐप/वेबसाइटों को एक मंच पर लाया गया।
  • EVM बैलेट पेपर दिशानिर्देश संशोधित — अधिक पठनीय प्रारूप।
  • EVM पर प्रत्याशियों के रंगीन फोटो — पहली बार लागू।
  • EVM माइक्रोकंट्रोलर की 5% जाँच — परिणाम के बाद तकनीकी सत्यापन।
  • फॉर्म 17C एवं EVM में अंतर होने पर अनिवार्य VVPAT गिनती।
  • डुप्लीकेट EPIC समस्या का समाधान।
  • 72 घंटे में डिजिटल इंडेक्स कार्ड जारी करना।


प्रशिक्षण एवं प्रशासनिक सुधार

  • BLO का IIIDEM में प्रशिक्षण — 7,000 से अधिक अधिकारियों को प्रशिक्षण।
  • BLA (राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि) का प्रशिक्षण।
  • पुलिस अधिकारियों का विशेष चुनाव प्रशिक्षण।
  • BLO को फोटो युक्त पहचान पत्र जारी।
  • चुनाव अधिकारियों के मानदेय में वृद्धि — BLO, पर्यवेक्षक, मतदानकर्मी, CAPF आदि।
  • डाक मतपत्रों की गिनती प्रणाली में सुधार — अंतिम चरण से पहले डाक मतपत्रों की गिनती अनिवार्य।


मतदाता सूची एवं कानूनी सुधार

  • बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (SIR)।
  • 15 दिनों में EPIC कार्ड वितरण की नई SOP।
  • मृत्यु पंजीकरण डेटा का डिजिटल उपयोग — नाम विलोपन हेतु।
  • 808 गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों की डीलिस्टिंग।
  • उपचुनाव से पूर्व विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR)।
  • ECI के कानूनी ढाँचे के पुनर्गठन हेतु राष्ट्रीय सम्मेलन।


राजनीतिक एवं अंतरराष्ट्रीय सहभागिता

  • 4,719 सर्वदलीय बैठकें — 28,000 से अधिक राजनीतिक प्रतिनिधियों की भागीदारी।
  • राजनीतिक दलों के शीर्ष नेतृत्व से 25 बैठकें।
  • 36 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के मीडिया एवं संचार अधिकारियों का प्रशिक्षण।
  • अंतरराष्ट्रीय चुनाव प्रबंधन संस्थाओं से द्विपक्षीय बैठकें।
  • ECI मुख्यालय में डिजिटलाइजेशन, संसाधन अनुकूलन एवं बायोमेट्रिक उपस्थिति।


निष्कर्ष

इन 30 पहलों के माध्यम से भारतीय चुनाव आयोग ने चुनाव प्रणाली को आधुनिक, पारदर्शी, तकनीकी रूप से सक्षम तथा मतदाता–केन्द्रित बनाने में ऐतिहासिक प्रगति की है। ये सुधार लोकतंत्र की नींव को मजबूत करते हुए नागरिकों के विश्वास को और गहरा करते हैं।


विस्तार से विवरण


1. मतदान केंद्रों पर मोबाइल जमा सुविधा

मतदान केंद्रों के बाहर मतदाताओं के मोबाइल फोन सुरक्षित रूप से जमा कराने की व्यवस्था की गई है। इससे मतदान के समय फोटो, वीडियो या किसी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना कम होती है और गोपनीयता व अनुशासन बनाए रखने में मदद मिलती है।


2. सुधारी गई वोटर सूचना पर्ची (VIS)

वोटर सूचना पर्ची में अब सीरियल नंबर और पार्ट नंबर बड़े और स्पष्ट अक्षरों में छापे जाते हैं। इससे मतदाता को अपने नाम की पहचान करने और मतदान केंद्र पर प्रक्रिया समझने में आसानी होती है, जिससे भ्रम और समय दोनों की बचत होती है।


3. प्रति मतदान केंद्र 1200 मतदाताओं की सीमा

प्रत्येक मतदान केंद्र पर अधिकतम 1200 मतदाताओं की सीमा निर्धारित की गई है। इससे मतदान के दिन अत्यधिक भीड़, लंबी कतारें और अव्यवस्था कम होती है। इससे वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं और दिव्यांग मतदाताओं को विशेष लाभ मिलता है।


4. ऊँची आवासीय परिसरों में अतिरिक्त बूथ

बहुमंज़िला इमारतों, अपार्टमेंट परिसरों और बड़ी सोसाइटियों में अतिरिक्त मतदान केंद्र बनाए जाते हैं। इससे स्थानीय निवासियों को दूर नहीं जाना पड़ता और मतदान प्रतिशत बढ़ता है। यह शहरी क्षेत्रों में मतदान सुविधा का एक महत्वपूर्ण सुधार है।


5. रियल-टाइम मतदान अपडेट

मतदान के दिन Presiding Officer अब हर दो घंटे में मतदान प्रतिशत ECINET ऐप पर अपलोड करते हैं। इससे आयोग और आम जनता को मतदान की स्थिति की सटीक जानकारी समय पर मिलती है और अफवाहों तथा गलत सूचनाओं पर नियंत्रण होता है।


6. 100% वेबकास्टिंग

प्रत्येक मतदान केंद्र पर वेबकैम के माध्यम से सीधी निगरानी की जाती है। इससे किसी भी प्रकार की गड़बड़ी, हिंसा या अनुचित गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई संभव होती है और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता व विश्वसनीयता में अत्यधिक वृद्धि होती है।


7. ECINET — एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म

ECINET चुनाव आयोग का एक व्यापक डिजिटल पोर्टल है जिसमें 40 से अधिक ऐप और वेबसाइटों को एक ही मंच पर जोड़ा गया है। मतदाता, राजनीतिक दल और अधिकारी सभी सेवाएँ एक स्थान से प्राप्त कर सकते हैं, जिससे प्रशासनिक प्रक्रिया सरल होती है।


8. EVM बैलेट पेपर दिशानिर्देशों का संशोधन

EVM पर प्रयुक्त बैलेट पेपर के डिज़ाइन को बदला गया है ताकि उम्मीदवारों के नाम और चिह्न अधिक स्पष्ट दिखें। इससे अशिक्षित और वृद्ध मतदाताओं को मतदान करने में सुविधा होती है और गलती की संभावना कम होती है।


9. EVM पर प्रत्याशियों के रंगीन फोटो

पहली बार EVM में प्रत्याशियों के रंगीन फोटो प्रदर्शित किए जा रहे हैं। इससे मतदाता प्रत्याशी की सही पहचान कर पाता है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ साक्षरता कम है। यह पहल गलत मतदान की संभावना को कम करती है।


10. EVM माइक्रोकंट्रोलर की 5% जांच

परिणाम घोषित होने के बाद 5% EVM मशीनों के माइक्रोकंट्रोलर की तकनीकी जाँच की जाती है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि मशीनों में किसी प्रकार की छेड़छाड़ या तकनीकी गड़बड़ी नहीं हुई है और परिणाम पूरी तरह विश्वसनीय हैं।


11. अनिवार्य VVPAT गिनती

यदि फॉर्म 17C और EVM के आँकड़ों में कोई अंतर पाया जाता है या मॉक पोल डेटा सही से हटाया नहीं गया हो, तो संबंधित मतदान केंद्र की सभी VVPAT पर्चियों की गिनती अनिवार्य रूप से की जाती है। इससे पारदर्शिता और भरोसा बढ़ता है।


12. डुप्लीकेट EPIC समस्या का समाधान

कुछ मतदाताओं को पहले समान EPIC नंबर जारी हो जाते थे। इस पहल के तहत ऐसे सभी मामलों को पहचान कर ठीक किया गया है, जिससे मतदाता सूची अधिक शुद्ध और भरोसेमंद बनी है तथा चुनावी धोखाधड़ी की संभावना कम हुई है।


13. 72 घंटे में डिजिटल इंडेक्स कार्ड जारी करना

चुनाव परिणाम घोषित होने के 72 घंटे के भीतर डिजिटल इंडेक्स कार्ड जारी किए जाते हैं। पहले यह प्रक्रिया महीनों में पूरी होती थी। इससे प्रत्याशियों, दलों और आयोग को आंकड़े जल्दी प्राप्त होते हैं और चुनावी विश्लेषण में सुविधा होती है।


14. BLO का IIIDEM में प्रशिक्षण

देशभर से 7,000 से अधिक Booth Level Officers और पर्यवेक्षकों को IIIDEM, नई दिल्ली में विशेष प्रशिक्षण दिया गया। इससे मतदाता सूची तैयार करने, संशोधन प्रक्रिया और फील्ड कार्य की गुणवत्ता में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है।


15. BLA (Booth Level Agents) का प्रशिक्षण

राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त Booth Level Agents को मतदाता सूची प्रक्रिया, आपत्ति, दावा और अपील संबंधी नियमों का प्रशिक्षण दिया गया। इससे राजनीतिक दलों की भागीदारी बढ़ी और सूची निर्माण अधिक पारदर्शी बना।


16. पुलिस अधिकारियों का विशेष प्रशिक्षण

चुनाव के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने हेतु पुलिस अधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए। इससे संवेदनशील क्षेत्रों में हिंसा, डराने-धमकाने और अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण संभव हुआ और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित किया गया।


17. BLO को फोटो पहचान पत्र

Booth Level Officers को मानक फोटो पहचान पत्र दिए गए हैं। इससे क्षेत्र में उनके कार्य की पहचान आसान हुई, जनता का भरोसा बढ़ा और फर्जी अधिकारियों द्वारा धोखाधड़ी की संभावना समाप्त हुई।


18. चुनाव अधिकारियों के मानदेय में वृद्धि

BLO, पर्यवेक्षकों, मतदान कर्मियों, CAPF और माइक्रो ऑब्जर्वर्स के मानदेय में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। इससे उनका मनोबल बढ़ा है और चुनावी कार्य को अधिक ईमानदारी और समर्पण के साथ करने की प्रेरणा मिली है।


19. डाक मतपत्रों की गिनती प्रणाली में सुधार

अब अंतिम चरण से पहले डाक मतपत्रों की गिनती पूरी करना अनिवार्य किया गया है। इससे परिणामों की घोषणा में पारदर्शिता आती है और यह सुनिश्चित होता है कि किसी भी मत की अनदेखी नहीं हो।


20. बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)

बिहार में मतदाता सूची को शुद्ध करने हेतु विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान चलाया गया। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि कोई पात्र नागरिक सूची से वंचित न रहे और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न हो।


21. 15 दिनों में EPIC वितरण की नई SOP

मतदाता सूची में किसी भी अपडेट के 15 दिनों के भीतर EPIC कार्ड वितरित करने की नई प्रक्रिया लागू की गई है। प्रत्येक चरण पर मतदाता को SMS सूचना दी जाती है, जिससे पारदर्शिता और सुविधा दोनों बढ़ी हैं।


22. मृत्यु पंजीकरण डेटा का डिजिटल उपयोग

Registrar General of India से मृत्यु पंजीकरण का डेटा डिजिटल रूप में प्राप्त कर मतदाता सूची से मृत व्यक्तियों के नाम हटाए जाते हैं। इससे सूची अधिक सटीक और अद्यतन बनी रहती है।


23. 808 गैर-मान्यता प्राप्त दलों की डीलिस्टिंग

नियमों का पालन न करने वाले 808 Registered Unrecognised Political Parties को डीलिस्ट किया गया। इससे चुनावी प्रणाली में अनुशासन बढ़ा और फर्जी राजनीतिक दलों के दुरुपयोग पर रोक लगी।


24. उपचुनाव से पहले विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR)

लगभग दो दशकों बाद पहली बार उपचुनाव से पहले मतदाता सूची का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण किया गया। इससे उपचुनाव अधिक विश्वसनीय और त्रुटिरहित सूची के आधार पर कराए गए।


25. ECI के कानूनी ढाँचे का पुनर्गठन

राष्ट्रीय स्तर पर कानूनी सलाहकारों और मुख्य चुनाव अधिकारियों का सम्मेलन आयोजित किया गया, जिससे चुनाव आयोग के कानूनी ढाँचे को मजबूत, आधुनिक और अधिक प्रभावी बनाया गया।


26. 4,719 सर्वदलीय बैठकें

देशभर में 4,719 सर्वदलीय बैठकें आयोजित की गईं, जिनमें 28,000 से अधिक राजनीतिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इससे चुनावी नियमों की जानकारी, पारदर्शिता और आपसी विश्वास में वृद्धि हुई।


27. राजनीतिक दलों के शीर्ष नेतृत्व से बैठकें

राष्ट्रीय और राज्य स्तर के दलों के अध्यक्षों और वरिष्ठ नेताओं के साथ 25 उच्चस्तरीय बैठकें की गईं, जिनमें चुनाव सुधार, आचार संहिता और प्रशासनिक समन्वय पर चर्चा हुई।


28. मीडिया एवं संचार अधिकारियों का प्रशिक्षण

36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मीडिया और संचार अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया। इससे चुनाव से जुड़ी सूचनाओं का प्रसार अधिक सटीक, समयबद्ध और जिम्मेदार तरीके से संभव हुआ।


29. अंतरराष्ट्रीय सहयोग बैठकें

चुनाव आयोग ने विश्व के विभिन्न देशों के चुनाव प्रबंधन संस्थानों के प्रमुखों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं, जिससे भारत की चुनावी प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय अनुभव और सर्वोत्तम प्रथाओं से लाभ मिला।


30. ECI मुख्यालय का डिजिटल आधुनिकीकरण

ECI मुख्यालय में बायोमेट्रिक उपस्थिति, ई-ऑफिस प्रणाली, संसाधन अनुकूलन और IIIDEM में स्थानांतरण जैसी पहलें लागू की गईं, जिससे प्रशासनिक कार्यकुशलता और पारदर्शिता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।


स्रोत 

ECI

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